सुना है कि , रहमत से मुलाकात हो जाती है

  सांसो  को , आज भी  महका  जाती है I हवा, जो तेरे शहर से गुजर  के आती है II   अपने शहर में खोजता हूँ , अपना पता I जाती एक बस तेरे शहर को, फिर तेरी याद दिला जाती है II   भोर  से  पहले  तेरा,   छत  पर आ जाना I मेरी साइकिल