#मशक्कतों_ से  साहिल _पे आए  है#

मशक्कतों  से  साहिल  पे आए  है,

दरकती   जमी  पे  पावं जमाए है,

बुझ  जाते है  चिराग नरम हवाओं  में भी

हमने  तोतूफान मै दिये जलाये है I

 

आँखों के तारे,   अब   न्यारे  है,

सहारे,          अब   किनारे    है,

खफा है ,     वो   आज तो  क्या

पर इस  जहान मे, वो  सबसे  प्यारे है I

 

हर रोज  बिलख  कर  पुकारा  है,

राह    को   बेनागा    बुहारा   है ,

सरकती  है  जिंदगी  इंतजार  मे

ये इंतज़ार ही, अब जीने का सहारा है I

 

सुधीर कुमार

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