ये बातें,

ये बातें ,कभी रुलाती है कभी हँसाती हैं I
कभी, ना जाने क्या – क्या कह जाती हैं II

ये बातें ,कभी जिंदगी दे जाती हैं I
कभी , जीते जी मार जाती हैं II

ये बातें ,कभी बड़ी आम होती हैं I
कभी , बेहद खास हो जाती हैं II

ये बातें ,कभी बेगानों को अपना बनाती हैं I
कभी ,अपनों को बेगाना कर जाती हैं II

ये बातें , कभी बांध देती है जन्मो के बंधन में I
कभी खून के रिश्ते भी तोड जाती हैं II

ये बातें ,कभी मनभाये की सब भाती हैं I
कभी एक बात पर दामन छुड़ा देती हैं II

ये बातें ,जीने कभी नहीं देती हैं I
कभी जीने के बजह बन जाती हैं II

ये बातें ,जब छू जाती है मन को I
कभी कहानी, कभी ग़ज़ल बन जाती हैं II
सुधीर कुमार

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