हिन्द के ये वीर सपूत

  स्वार्थ से परे, परमार्थ से भरे, जीवन जीवंत कर जाते है, है हिन्द के ये वीर सपूत जो I मातृभूमि को जीवन अर्पित कर जाते है II शान हो, अभिमान हो , शान हो तुम हिन्द की , अभिमान हो हिन्द का, अमन है तुम्हारे नाम से हम सत सत, नमन कर जाते है

ये बातें,

ये बातें ,कभी रुलाती है कभी हँसाती हैं I कभी, ना जाने क्या – क्या कह जाती हैं II ये बातें ,कभी जिंदगी दे जाती हैं I कभी , जीते जी मार जाती हैं II ये बातें ,कभी बड़ी आम होती हैं I कभी , बेहद खास हो जाती हैं II ये बातें ,कभी बेगानों