मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता था

ऊचे दरख़्त है, सामने घर के  उसके I

जहाँ अक्सर , वो  बैठा करता था II

मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता  था

 

कर देंगे बयां , दर  उसके  घर  के I

कि अक्सर वो, उनकी राह तकता रहता था II

मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता  था

 

खफा  हो जायेगा , चाँद भी उनसे I

जो अक्सर खिड़की से झाँका करता था II

मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता  था

 

बहुत  रोयेगे , लिपट कर उन दीवारों से I

जहाँ, वो उनकी यादो को सजोये रहता था II

मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता  था

 

लौटोगे , जरूर एक  दिन तुम यहाँ I

बड़े यकीन से वो ये बात कहता था II

मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता  था

 

सुधीर कुमार

 

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