मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता था

ऊचे दरख़्त है, सामने घर के  उसके I जहाँ अक्सर , वो  बैठा करता था II मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा करता  था   कर देंगे बयां , दर  उसके  घर  के I कि अक्सर वो, उनकी राह तकता रहता था II मत देना उसका पता यारो, जहाँ पर वो रहा

पापा !

पापा !  अब  तुम्हारे,   बिना  रह  लेता  हूँ I हर  जिम्मेदारी  को,  ख़ुशी  से सह लेता   हूँ II   पापा !  छोटा , अब पहले से  बड़ा  हो  गया  है। बन के मेरी लाठी , अब  साथ  खड़ा हो  गया   है II   पापा ! दीदी  की  राखी,  हर  साल आती  है। पर  वो  कभी-