तुम देख न लो देखते हुए, इस बात से मन घबराता है

तुम  देख लो  देखते हुए, इस बात से मन घबराता है

सामने जब तुम आते हो, जाने   क्यूँ  ये सर झुक जाता है

 

हो    जाओ तुम  रुसवा, अक्सर  ये  डर  सताता है

  चाहते हुए भी  ,तेरा जिक्र दोस्तों में हो ही जाता है

 

वे इंतहा  चाहत  है,  मेरे  दिल  में  जरूर  सनम

पर हर  कोई  मुकदर का सिकंदर तो  नहीं हो जाता है

 

मेरी चाहत  की  ख़बर से  महरूम रहो तुम  – अनम

हर किस्सा चाँद और चकोर के तरह मशहूर नहीं हो जाता है

                                                                            सुधीर कुमार

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